मने के हारे हार है, मन के जीते जीत

पने ‘सोले’ फिल्म का ये प्रसिद्ध डायलॉग किसी न किसी रूप में अवश्य ही सुना होगा– “जो डर गया, समझो वो मर गया”। इस एक लाइन में सफलता का सर्वोत्तम सूत्र छुपा हुआ है। जीवन एक जंग है जो जितनी बहादुरी और निडरता से लड़ता है, वो उतनी दूर तक पहुंचता है और उसी अनुपात में सफलता प्राप्त करता है। ज़िंदगी की राहों में मुश्किलें आती- जाती रहती हैं, पर उन मुश्किलों को सफलता की राहों की रुकावट समझना वेबकूफी है। महान लोग, जिन्होने इतिहास बनाया, उनके लिए भी जीवन कभी फूलों की सेज नहीं रहा। एक कहावत है कि “शांत समुद्र में आप कभी भी कुशल नाविक नहीं बन सकते”

हम अक्सर ही यह सोच कर प्रयास करना छोड़ देते हैं, कि सफलता मिलना असंभव है। हम बार-बार यही सोचते रहते हैं कि
यह काम तो बहुत कठिन है, लगता है, मैं ये नही कर पाऊँगा, मुझसे पहले कितने ही लोगों ने कोशिश की और सफल नहीं हुए। फिर चाहे कोई Exam हो या कोई अन्य काम, इस तरह के विचार हमारे दिमाग में तब आते हैं, जब हमारा ध्यान हमारे लक्ष्य पर केन्द्रित न होकर कार्य की कठिनता पर केन्द्रित हो जाता है। और यकीन मानिए मित्रो, एक बार जब हमारे दिमाग में सफलता के प्रति शंका उत्पन्न हो गई तो फिर सफल होना असंभव ही है। ‘स्वामी विवेकानंद जी’ ने कहा था- “विचार बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि जो कुछ हम सोचते हैं, वही हम हो जाते हैं”। इसलिए स्वयं को हमेशा एक विजेता समझिए और एक Topper के रूप में देखिए। हमारा दिमाग हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। जैसे विचार हमारे दिमाग में आने लगते हैं अर्थात जैसा हम सोचते हैं, हमारे शरीर में वैसे ही हार्मोन्स स्रावित होने लगते है और वह वैसी ही प्रतिक्रिया करने लगता है। आधुनिक शोधों के माध्यम से यह सिद्ध हो चुका है और चिकित्सा विज्ञान ने भी मान लिया है कि कितने ही लोग अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर असाध्य बीमारियों पर जीत पाने में सफल हुए हैं, जबकि उनका शारीर पूरी तरह जवाब दे चुका होता है। स्पष्ट है मनुष्य के पास दो प्रकार की शक्तियाँ होती हैं, एक शारीरिक और दूसरी मानसिक। जहां शारीरिक शक्ति की सीमा समाप्त हो जाती है, वहाँ मानसिक शक्ति ही काम आती है। इसी मानसिक शक्ति के बल पर कहा जाता है कि, हर व्यक्ति में अपार संभावनाएं हैं

अगर हमें सफलताओं की राह में आगे बढ़ाना है, तो असफलताओं के बारे में सोचकर डरना नहीं बल्कि और मजबूत होकर आगे बढ़ना होगा। आपने सुना ही होगा कि ‘डर के आगे जीत है’। रास्ते में लगने वाली हर एक ठोकर हमारे लिए एक प्रेरणा बन सकती है। असफल होने पर आम आदमी मायूस होकर सुरक्षित और पलायनवादी नज़रिया अपनाता है, जबकि विजेता हर असफलता को एक नए अवसर के रूप में लेते हैं और नए रिकार्ड बनाते हैं। यदि आपने मन में ठान लिया है कि जीत मेरी ही होनी है तो कोई कारण नहीं कि आप सफल न हों, क्योंकि “मन के हारे हार है, मन के जीते जीत”।

अंत में ‘बेवर्ली सिल्स’ के इस प्रसिद्ध कथन के साथ अपनी बात समाप्त करना चाहूँगा- “असफल होने पर आप निराश हो सकते हैं, किन्तु आपने कोशिश ही नहीं की, तो आपका नाश हो जाएगा”। अत: कोशिश करने से कभी मत डरो ।


"लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती।
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती॥"

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